पीरियड्स में सेक्स: मिथ्स, सेफ्टी और आनंद

क्या आपने कभी सोचा है कि माहवारी के दौरान भी सेक्स का आनंद लिया जा सकता है? हमारे समाज में इस विषय पर इतनी चुप्पी और गलतफहमियां हैं कि ज्यादातर महिलाएं इसे पूरी तरह से टाल देती हैं। लेकिन सच्चाई यह है कि पीरियड्स के दिनों में भी सेक्स का अपना अलग ही मजा है। आज मैं इस ब्लॉग में पीरियड्स में सेक्स के मिथकों को तोड़ूंगी, सुरक्षा के पहलुओं पर चर्चा करूंगी और बताऊंगी कि इसे कैसे आनंददायक बनाया जा सकता है।

सबसे पहले आम मिथकों पर बात करते हैं। सबसे बड़ा मिथक यह है कि पीरियड्स में सेक्स करना अस्वच्छ या खतरनाक होता है। वास्तव में, मासिक धर्म का खून शरीर का प्राकृतिक स्राव है और इसमें कोई संक्रमण नहीं होता, बशर्ते दोनों पार्टनर स्वस्थ हों। दूसरा मिथक है कि इस दौरान गर्भधारण नहीं हो सकता। यह पूरी तरह सही नहीं है। हालांकि संभावना कम होती है, लेकिन ओवुलेशन का समय अनियमित होने पर गर्भावस्था का खतरा अभी भी रहता है। इसलिए गर्भनिरोधक का इस्तेमाल जरूर करें।

कई लोग मानते हैं कि पीरियड्स में योनि में दर्द बढ़ जाता है या सेक्स असुविधाजनक होता है। जबकि कुछ महिलाओं को क्रैंप्स से राहत मिलती है क्योंकि ऑर्गेज्म के दौरान शरीर एंडोर्फिन्स रिलीज करता है जो प्राकृतिक दर्द निवारक का काम करते हैं। एक और आम धारणा है कि पुरुष पार्टनर को यह पसंद नहीं आता। लेकिन सच्चाई यह है कि खुली बातचीत के बाद कई जोड़े इसे अपने रिश्ते का खूबसूरत हिस्सा बनाते हैं।

सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण – पीरियड्स में सेक्स करते समय सुरक्षा का विशेष ध्यान रखना चाहिए। सबसे पहले तो दोनों पार्टनर की सहमति जरूरी है। मेरी सलाह है कि अपने पार्टनर से खुलकर बात करें। बताएं कि आपको कैसा महसूस होता है और उनकी भावनाओं का भी सम्मान करें। जब दोनों तैयार हों तभी आगे बढ़ें।

स्वच्छता बनाए रखें। सेक्स से पहले हल्का स्नान या जननांगों की अच्छी सफाई करें। डार्क कलर के टॉवेल या बेडशीट का इस्तेमाल करें ताकि कोई चिंता न रहे। कंडोम का इस्तेमाल न सिर्फ गर्भनिरोधक के रूप में बल्कि संक्रमण से बचाव के लिए भी बहुत जरूरी है क्योंकि पीरियड्स के दौरान गर्भाशय का मुंह थोड़ा खुला रहता है, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। अगर आप कोई अन्य गर्भनिरोधक इस्तेमाल करती हैं तो डॉक्टर से सलाह लेकर ही आगे बढ़ें।

आनंद का अनुभव – अब बात करते हैं आनंद की। पीरियड्स के दौरान योनि क्षेत्र में ज्यादा रक्त प्रवाह होता है, जिससे संवेदनशीलता बढ़ जाती है। कई महिलाओं को इस दौरान क्लिटोरिस और योनि की उत्तेजना ज्यादा तीव्र महसूस होती है। लुब्रिकेशन की कोई कमी नहीं रहती क्योंकि पीरियड ब्लड खुद में नेचुरल लुब्रिकेंट का काम करता है।

मेरी अपनी बात करूं तो मेरे और मेरे बॉयफ्रेंड के बीच पीरियड्स में सेक्स का अनुभव बहुत खास रहा है। मुझे व्यक्तिगत तौर पर इस दौरान सेक्स करने में बहुत आनंद आता है। वह गीला और गर्म एहसास, जो पीरियड ब्लड की वजह से होता है, मुझे बेहद उत्तेजित करता है। यह भावना मुझे और करीब लाती है। लेकिन यह मेरी व्यक्तिगत अनुभूति है। हर महिला का शरीर अलग होता है। इसलिए सबसे पहले अपने पार्टनर को पूरी तरह कॉन्फिडेंस में लें, उनकी सहमति लें और तब ही इस आनंद को महसूस करें।

कैसे करें बेहतर?

  • आरामदायक पोजीशन चुनें: मिशनरी पोजीशन में तकिए को कमर के नीचे रखकर या साइड बाय साइड पोजीशन अच्छा रहता है। इससे ब्लड फ्लो को कंट्रोल किया जा सकता है।
  • फोरप्ले को लंबा करें: चूमने, छूने और मालिश से शरीर को तैयार करें। इससे दर्द कम होता है और आनंद बढ़ता है।
  • सेक्स टॉयज: अगर आप दोनों सहमत हों तो वाइब्रेटर का इस्तेमाल क्लिटोरिस उत्तेजना के लिए बहुत अच्छा रहता है।
  • बाद की देखभाल: सेक्स के बाद हल्का साफ पानी से धोएं, आराम करें और गर्म पानी की बोतल या हल्की मालिश से क्रैंप्स को शांत करें।

कब बचें? अगर आपको बहुत तेज दर्द, असामान्य बदबू, बुखार या कोई संक्रमण के लक्षण हैं तो इस दौरान सेक्स से बचें और डॉक्टर से सलाह लें।

दोस्तों, पीरियड्स को सेक्स की राह में रुकावट न समझें। यह आपके रिश्ते को और गहरा बना सकता है अगर आप दोनों खुलकर बात करें और सुरक्षा का ध्यान रखें। शरीर की हर अवस्था में आनंद लेने का अधिकार हमें है। बस सहमति, सुरक्षा और प्यार के साथ।

आपका क्या अनुभव है? कमेंट्स में जरूर शेयर करें। अगर आपके कोई सवाल हैं तो पूछिए, मैं जवाब दूंगी।

अपने और अपने पार्टनर के स्वास्थ्य का ख्याल रखें।

आपकी

काव्या कुमार

रिलेशनशिप और इंटिमेसी एक्सपर्ट


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